स्वयं सहायता समूह की नियमावली | swayam sahayata samuh ki niymawali 2024

स्वयं सहायता समूह को अंग्रेजी में SHG कहा जाता है। अंग्रेजी में इसका पूरा नाम SELF HELP GROUP होता है। स्वयं सहायता समूह का गठन भारत सरकार आजीविका योजना के तहत किया जाता है। स्वयं सहायता समूह का गठन शहरी व ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं कर सकती हैं। शहरी क्षेत्र में इस योजना को दीनदयाल उपाध्याय योजना के नाम से भी जाना जाता है। ग्रामीण क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह के नाम से।

स्वयं सहायता समूह की नियमावली | swayam sahayata samuh ki niymawali 2024
स्वयं सहायता समूह की नियमावली
स्वयं सहायता समूह की नियमावली

स्वयं सहायता समूह की नियामवली।

स्वयं सहायता समूह के गठन के बाद समूह चलाने के लिए राष्ट्रीय आजीविका मिशन ने एक नियमावली बनाई है। ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं स्वयं सहायता समूह को इस नियमावली के आधार पर ही चलाती हैं।

समूह गठन के बाद समूह सखी स्वयं सहायता समूह चलाने की नियमावली के बारे में समूह की महिलाओं को अवगत कराती है।

आइए जानते हैं स्वयं सहायता समूहों को चलाने की नियमावली क्या है।

1. स्वयं सहायता समूह के गठन के बाद नियमित साप्ताहिक बैठक।

स्वयं सहायता समूह के गठन के बाद समूह के नियमावली के अंतर्गत समूह में साप्ताहिक बैठक होना आवश्यक है। Swayam sahayata samuh  की महिलाएं प्रत्येक सप्ताह के 1 दिन साप्ताहिक बैठक करते हैं। समूह की इस बैठक में समूह की महिलाएं प्रार्थना करने के बाद  प्रस्ताव पर चर्चा करती हैं।

समूह की बैठक के दौरान महिलाएं साप्ताहिक बचत के रूप में धन एकत्र करती हैं एवं समूह के खाते में उसे जमा किया जाता है। 

2. प्रस्ताव पर चर्चा

स्वयं सहायता समूह में प्रस्ताव का अर्थ है स्वयं सहायता समूह के किसी भी महिला के आर्थिक संकट अथवा किसी रोजगार को स्थापित करने के लिए योजना बनाना।

सप्ताहिक बैठक के दौरान प्रस्ताव में किसी समस्या अथवा कोई ग्रह उद्योग अथवा उद्योग लगाने हेतु प्रस्ताव पारित किया जाता है। इसके लिए समूह की महिलाओं को राष्ट्रीय आजीविका मिशन के तहत लोन भी दिया जाता है।

3. स्वयं सहायता समूह की कार्यपुस्तिका लिखना।

स्वयं सहायता समूह की महिलाएं बैठक के दौरान हुई चर्चाओं और बैठक में बचत किए गए धन की धनराशि का लेखा-जोखा एक पुस्तिका पर लिखती हैं।

कार्य पुस्तिका पर कार्य करने वाली महिला अध्यक्ष कोषाध्यक्ष अथवा bk (Book keepar) हो सकती है। इसे कार्यपुस्तिका में बैठक में शामिल हुई महिलाओं के नाम उनके हस्ताक्षर तथा बचत किए गए धन की धनराशि का लेखा-जोखा होता है।

4.समूह में कोई नियम बहुमत के आधार पर पारित होगा।

स्वयं सहायता समूह में बैठक के दौरान कोई भी नियम अथवा प्रस्ताव सभी महिलाओं की सहमति पर पारित होगा। अर्थात यदि किसी योजना स्वरजगार के लिए धन एकत्र किया जाना है अथवा लोन लिया जाना है तो इस पर सभी महिलाएं समान रूप यूसे अपनी सहमति देंगे तभी कोई नियम पारित हो सकेगा।

5. समस्या का समाधान समूह के सदस्यों द्वारा

समूह के किसी भी सदस्य की आर्थिक समस्या अथवा किसी अन्य प्रकार के विवाद उत्पन्न होने पर समूह के सदस्य आपस में ही प्रस्ताव पारित करके विचार विमर्श के द्वारा समस्या का समाधान करेंगे।

6. समूह की बैठक में सही समय पर उपस्थित होना।

समूह के सदस्यों को यह सुनिश्चित करना होगा जिससे समय समूह के अध्यक्ष कोषाध्यक्ष और सचिव समूह की बैठक बुलाएं, बैठक में सही समय पर पहुंचना अनिवार्य होगा। समूह की सप्ताहिक बैठक में सही समय पर ना पहुंचने पर समूह के सदस्य को ₹5 दंड स्वरूप देना होगा।

7. समूह की सदस्यता निरस्त हो ना।

एक स्वयं सहायता समूह 10 से 12 महिलाओं को मिलकर बनता है। समूह की बैठक में कोई भी सदस्य यदि 5 से 6 दिन लगातार समूह की बैठक में उपस्थित नहीं होता है। ऐसी स्थिति में उस सदस्य को समूह से बाहर किया जा सकता है। किसी भी समूह के सदस्य की सदस्यता समाप्त करने पर विचार विमर्श करने के लिए समूह की बैठक बुलाई जाएगी जिसमें अध्यक्ष कोषाध्यक्ष और सचिव एवं अन्य समूह के सदस्य विचार विमर्श कर प्रस्ताव पारित करेंगे।

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